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शब्द मिलते नहीं कहना है कितना कुछ, 

समझों खामोशिया तुम मेरे दोस्तों 

हर दुआ का असर मुझपे ऐसा हुआ ... 

मुझको फिर से नयी जिंदगी मिल गयी | 

 

सीख भी कुछ मिली हर ख़ुशी मिल गयी .... 

कुछ बातें जो चाहा था मैंने बदलना कभी 

ऐसे बदली की मेरी जिंदगी बदल गयी | 

 

ए मेरे रब करों सब पे इतनी कृपा 

देख पाएं हमेशां रौशनी की किरण 

सबकों रिश्तें मिलें जैसे मुझको मिलें 

हर कदम पे आप जैसे फ़रिश्तें मिलें 

शब्द मिलते नहीं कहना है कितना कुछ

 समझों खामोशिया तुम मेरे दोस्तों | 

 

शब्द मिलते नहीं कहना है कितना कुछ 

समझों खामोशिया तुम मेरे दोस्तों 

सबकों रिश्तें मिलें जैसे मुझको मिलें 

हर कदम पे आप जैसे फ़रिश्तें मिलें || 

सभी दोस्तों को समर्पित ....उपेंद्र मौर्य




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UPENDRA
Last Online: Saturday 28/07/18 | Published on: Friday 20/07/18

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