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आज ये दुनिया मायूस सी लग रही है।

 ये शहर भी आज खामोश हो गया है। 

यो तो आने जाने का सिलसिला लगा ही रहता है।

 पर ये कोई गुजरा यहाँ से कि हर कोई हैरान रह गया है। 

 

आँखो मे न जाने क्यो समुंदर सा उमर रहा है।

 इस दिल पर कोई खंजर सा चल गया है। 

यो तो तूफानो के गुजर जाने का एहसास तक न होता था। 

पर वे गुजरे यहाँ से और सारा मंजर ही बदल गया है। 

 

शब्द भी आज खाली सी हो गयी है। 

कविता भी आज थोड़ी बेगानी हो गयी है। 

जहाँ सजा करती थी महफिले कभी। 

अब वह भी खामोशी के चादर मे लिपट गयी है। 

 

चलती रहेगी ये दुनिया हजारो साल तक। 

अफसाने भी बनते रहेगे हर कदम पर। 

गुजर जायेगा ये पल भी, ये सबको खबर है। 

पर हर गुजरते पल मे, पहले वाली अब बात न होगी।




Author

Kumud Ranjan
Last Online: Monday 24/09/18 | Published on: Friday 17/08/18

Kumud Ranjan is the author of this content.

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