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मोबाइल युहीं हट्टा-कट्टा नहीं

 बहत कुछ खाया -पिया है इसने ! 


 ये हाथ की घड़ी खा गया ,

 ये टोर्च लाइट खा गया ,

 ये चिट्टी पत्रिया खा गया ,

 ये किताबे खा गया ,

 ये रेडियो खा गया, 

ये टेप रिकॉर्डर खा गया ,

 ये कैमरा खा गया , 

ये कैलकुलेटर खा गया ,

 ये दोस्ती खा गया ,

 ये मेल मिलाप खा गया ,

 ये हमारा वक्त खा गया ,

 ये हमारा सुकून खा गया ,

 ये पैसे खा गया 

ये रिश्ते खा गया , 

ये जायदाद खा गया, 

ये तंदुरुस्ती खा गया !


इतना खा कर ही स्मार्ट बना है , 

बदलती दुनिया का ऐसा असर होने लगा , 

आदमी पागल और फ़ोन स्मार्ट होने लगा ! 

जबतक फ़ोन वायर से बंधा हुआ था 

,आदमी आज़ाद था 

अब फ़ोन आज़ाद हुआ है ,

पर आदमी फ़ोन से बंधा हुआ है ! 


जुबान से रिश्ते निभाने का वक्त कहाँ , 

उँगलियाँ ही रिश्ते निभा रही है ,

 सब टच में बिजी हैं ,

पर टच में कोई नहीं !


Babita kumari
Last Online: Monday 06/08/18 | Published on: Saturday 14/07/18

Babita kumari is the author of this content.

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