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एक दोस्त मिला मुझे यहां कुछ ऐसा, 

हर वक्त कुछ नया कहे उन तस्वीरों जैसा। 

हँसना उसके चेहरे से कम नहीं होता, 

गम की बातें भी वो हँसते-हँसते कहता॥ 

क्या खूब उसका अंदाज़, क्या खूब दोस्ती उसकी, 

आसमां पर चमकते उन सितारों जैसी। 

अक्सर एक ही टॉपिक पर भीड़ जाते हम बार-बार, 

हर वक्त अपनी तर्क से जीत जाता है वो॥ 

होती है खुशी हार कर भी उससे, 

एक नई जीत दिलाकर उसे॥ 

कहता हैं वो मुझको तुम बिल्कुल नहीं मेरे जैसी हो, 

मैं उसको कहुँ पागल तो वो फिर कहता मुझे पागल हैं। 

उसके तारीफ लिखने में तो सारी कयानात कम हैं, 

बस इतना समझो उसके बिना हर महफ़िल अधूरी हैं॥




Author

Sandeepa Kumari
Last Online: Sunday 23/09/18 | Published on: Friday 31/08/18

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