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मैं ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

मै ये बिलकुल नहीं कहती कि मुझे मोहब्बत है तुमसे

हाँ मगर ये बात अलग है कि मै अपनी सारी बातें करती हूँ बस तुमसे

मेरी हर जिद्द खत्म नहीं होती तब तक जब तक हाँ ना मनवा लू तुमसे

मै ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

हाँ मगर ये बात अलग है कि सुकून मुझे मिलती है छोटी छोटी बातों पर बस झगड़ के तुमसे

मेरे यकीन ना करने पे झट से केह देना कसम से

मै ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

हाँ मगर ये बात अलग है कि मेरी बाते ही खत्म होती जब बातें होती हो तुमसे

जाने कभी क्यों नहीं अखरता मुझे यु घंटों बात कर लेना तुमसे

मै ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

हाँ मगर ये बात अलग है कि मुझे तुम जानते हो ज्यादा मुझसे

मेरे ना खाने पे वो सडा हुआ मुँह बनाना तुमने सीखा है किससे

प्यार तो नहीं पर सच्ची दोस्ती है तुमसे

मै ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

जब भी गुस्सा करते हो लगता है कि कान के नीचे बजा दुँ कस के

गुस्सा बहुत आता है मगर मनाने पे तेरे जाने कैसे

मान जाती हूँ झट से

मै ये नहीं कहती की मुझे मोहब्बत है तुमसे

मै ये कभी नहीं कहती कि मुझे मोहब्बत है तुमसे

क्योंकि अपना रिश्ता है दोस्ती का जो ऊपर है इन सब से .

....अदिति प्रजापति.....




Author

Aditi kumari
Last Online: Sunday 08/07/18 | Published on: Saturday 07/07/18

Aditi kumari is the author of this content.

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